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अंपायरिंग में दोहरा मापदंड क्यों? भड़के वेस्टइंडीज कप्तान रोस्टन चेज, उठाई सजा देने की मांग

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जब कोई खिलाड़ी मैदान पर अपना सब कुछ झोंक दे और फिर भी किसी गलत फैसले की वजह से उसकी मेहनत पर पानी फिर जाए, तो दिल दुखता है। हम बात कर रहे हैं वेस्टइंडीज के कप्तान रोस्टन चेज की, जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में खराब अंपायरिंग को लेकर खुलकर सामने आए हैं। चेज ने अंपायरों की विवादास्पद फैसलों पर चुप्पी और सजा से छूट को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

“खिलाड़ियों को सजा मिलती है, अंपायर क्यों बच जाते हैं?”

बारबाडोस में खेले गए पहले टेस्ट में वेस्टइंडीज को ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे दिन ही 159 रनों से हरा दिया। लेकिन इस हार के पीछे सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की ताकत नहीं थी, बल्कि कुछ ऐसे फैसले भी थे, जिन्होंने वेस्टइंडीज की उम्मीदों को तोड़ दिया। खासकर कप्तान रोस्टन चेज के खुद के आउट होने का मामला—जब उन्हें पैट कमिंस की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट करार दिया गया, जबकि रिप्ले में साफ दिखाई दे रहा था कि गेंद पहले बल्ले को छूकर पैड से टकराई थी।

चेज ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा, “जब खिलाड़ी कोई गलती करता है तो उस पर जुर्माना लगता है, लेकिन अंपायर अगर कोई गलत निर्णय लेते हैं तो उनके साथ कुछ नहीं होता। यह सही नहीं है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक गलत फैसला किसी खिलाड़ी का करियर खराब कर सकता है और इसलिए अंपायरों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

विवादों से भरा रहा पहला टेस्ट

यह सिर्फ रोस्टन चेज का मामला नहीं था। पहले ही दिन तीन बड़े फैसले विवाद में रहे, जिसमें सबसे चर्चित मामला ट्रेविस हेड का था। स्टंप के पीछे कैच लेने का मामला था, लेकिन टीवी अंपायर ने नॉट आउट दे दिया क्योंकि शाई होप का कैच पूरी तरह क्लियर नहीं दिख रहा था। इससे वेस्टइंडीज को एक अहम विकेट से हाथ धोना पड़ा।

चेज ने कहा कि यदि अंपायरों को उनके फैसलों के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाती, तो यह खेल के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने मांग की कि अंपायरों पर भी जुर्माना या सजा का प्रावधान होना चाहिए, ताकि वे अपने फैसलों को लेकर और ज्यादा सतर्क रहें।

क्या बदलाव लाएगा यह बयान?

क्रिकेट की दुनिया में खिलाड़ियों के अनुशासन पर सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन अंपायरिंग को लेकर कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। रोस्टन चेज के इस बयान ने अब बहस को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ICC इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या भविष्य में अंपायरिंग के मानकों को लेकर कोई ठोस नीति बनाई जाती है या नहीं।


डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार रोस्टन चेज के हैं और ICC या संबंधित क्रिकेट बोर्ड द्वारा कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा करें।


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