जब कोई ऐसा बल्लेबाज मैदान पर उतरता है जो विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाते हुए भी विरोधी टीमों के होश उड़ा दे, तो क्रिकेट प्रेमियों का दिल उसी के नाम की धड़कन बन जाता है। हम बात कर रहे हैं ऋषभ पंत की, जिन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स टेस्ट में दोनों पारियों में शतक जड़कर इतिहास रच दिया। पंत अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के टॉप विकेटकीपर बल्लेबाजों में गिने जा रहे हैं। उनकी तुलना अब ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज एडम गिलक्रिस्ट और भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी से की जा रही है।
लेकिन असली सवाल ये है — जब इन तीनों के करियर के पहले 44 टेस्ट मैचों के आंकड़े सामने रखें जाते हैं, तो सबसे ज्यादा प्रभावशाली कौन नजर आता है? जवाब जानकर शायद आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी।
पंत का बल्ला बोल रहा है, आंकड़े कर रहे हैं तारीफ
ऋषभ पंत ने अपने 44 टेस्ट की 77 पारियों में 3200 रन बनाए हैं, वो भी 44.44 की औसत और 74.03 के स्ट्राइक रेट से। यह आंकड़े खुद-ब-खुद उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली की कहानी बयां करते हैं। उन्होंने इन पारियों में 15 अर्धशतक और 8 शतक जड़े हैं। खास बात ये है कि वो अभी सिर्फ 27 साल के हैं और उनका करियर नई ऊंचाइयों को छूने की ओर अग्रसर है।
वहीं गिलक्रिस्ट ने अपने पहले 44 टेस्ट की 62 पारियों में 2940 रन बनाए थे। उनका औसत भले ही पंत से ज्यादा यानी 58.80 रहा हो, लेकिन पंत की पारियों की संख्या और खेलने की शैली को देखकर फर्क साफ नजर आता है। गिलक्रिस्ट का स्ट्राइक रेट 82.65 जरूर पंत से ऊपर रहा है, लेकिन शतक और अर्धशतक के मामले में दोनों लगभग बराबरी पर हैं।
अब आते हैं एमएस धोनी पर, जिनका नाम भारतीय क्रिकेट में श्रद्धा के साथ लिया जाता है। लेकिन 44 टेस्ट मैचों के बाद धोनी सिर्फ 2465 रन ही बना सके थे, उनका औसत 41.77 और स्ट्राइक रेट 60.96 था। उन्होंने इस दौरान 17 अर्धशतक और केवल 4 शतक लगाए थे।
क्यों पंत बनते जा रहे हैं ‘गेम चेंजर’
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और भारत के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने हाल ही में कहा था कि पंत ने उन्हें पहली बार देखने पर गिलक्रिस्ट की याद दिला दी। लेकिन उनकी खास बात है – अनप्रिडिक्टेबल स्टाइल। वो पहली ही गेंद पर आक्रामक शॉट खेलने से नहीं हिचकते और ऐसे शॉट्स लगाते हैं जो परंपरागत क्रिकेट की किताबों में भी नहीं मिलते। यही बात उन्हें एक खास ‘मैच विनर’ बनाती है।
पंत ने हाल ही में आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में भी अपनी जगह मजबूत की है और अब वह दुनिया के टॉप-10 टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल हो चुके हैं।
आंकड़ों से परे है पंत की मौजूदगी का असर
क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास, आक्रामकता और निर्णायक सोच का खेल है जो खिलाड़ी को बाकी सबसे अलग बनाता है। पंत इसी मायने में सबसे आगे दिखते हैं। गिलक्रिस्ट की तरह वह मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं और धोनी की तरह मैच को अपनी रणनीति से पकड़ में रखते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख पूरी तरह से उपलब्ध आंकड़ों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। इसमें किसी खिलाड़ी की तुलना का उद्देश्य उनकी आलोचना नहीं बल्कि उनके प्रदर्शन की तुलना मात्र है। पाठकों से निवेदन है कि इस विश्लेषण को एक खेल भावना से देखें।
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