जब कोई खिलाड़ी अपने करियर में 34,000 से ज्यादा रन बनाता है और 100 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ता है, तो दुनिया उसे सिर आंखों पर बिठाती है। हम बात कर रहे हैं क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर की, जिनकी उपलब्धियों को हर क्रिकेट प्रेमी श्रद्धा की नजर से देखता है। लेकिन क्या हो अगर देश को पहला वर्ल्ड कप जिताने वाले कपिल देव ही सचिन को ‘महान बल्लेबाज’ मानने से इनकार कर दें? जी हां, ये बयान खुद कपिल देव ने दिया था और इसके पीछे की वजह जानकर आप भी चौंक सकते हैं।
कपिल देव का यह बयान अचानक नहीं आया। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि उनकी नजर में ‘महानता’ केवल आंकड़ों से तय नहीं होती, बल्कि उस मानसिकता से होती है जो खिलाड़ी को मैदान पर निर्दयी बनाती है। कपिल का कहना है कि सचिन तेंदुलकर में प्रतिभा तो थी, लेकिन वह उतनी आक्रामक मानसिकता नहीं दिखा सके, जो उन्हें महान बल्लेबाज की श्रेणी में लाती।
क्यों नहीं मानते कपिल देव सचिन को ‘महान बल्लेबाज’?
कपिल देव ने अपने इंटरव्यू में कहा कि अगर किसी बल्लेबाज के पास सचिन जैसी तकनीक, अनुभव और क्लास है, तो फिर उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह टेस्ट क्रिकेट में 300 रन के आंकड़े तक जरूर पहुंचे। कपिल ने माना कि सचिन के पास यह काबिलियत थी, लेकिन उन्होंने कभी उस स्तर की ‘निर्दयी बल्लेबाजी’ नहीं की। उनके मुताबिक, सचिन अक्सर शतक के बाद धीमे हो जाते थे, जबकि उन्हें उस समय और अधिक आक्रामक हो जाना चाहिए था।
सचिन तेंदुलकर के करियर पर नजर डालें तो उन्होंने टेस्ट में 248 रन की नाबाद सर्वश्रेष्ठ पारी खेली है, लेकिन उनके नाम एक भी तिहरा शतक नहीं है। कपिल देव का मानना है कि अगर सचिन अपनी बल्लेबाजी में थोड़ी क्रूरता दिखाते, तो उनके नाम कम से कम 3 तिहरे और 10 दोहरे शतक होते।
रिश्तों में भी दिखी खटास
सिर्फ आंकड़ों तक ही नहीं, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर के आपसी रिश्ते भी कभी बहुत मधुर नहीं रहे। साल 2000 में जब सचिन टीम इंडिया के कप्तान थे और कपिल देव कोच, तब दोनों के बीच मतभेद उभर कर सामने आए थे। सचिन ने अपनी आत्मकथा ‘Playing It My Way’ में लिखा था कि कपिल देव टीम की रणनीतियों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते थे, जिससे उनके नेतृत्व पर असर पड़ा। यह बात दोनों के रिश्तों में दरार की बड़ी वजह बनी।
क्या केवल आंकड़े ही बनाते हैं किसी को महान?
इस बहस में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या केवल रिकॉर्ड ही किसी खिलाड़ी को महान बनाते हैं? कपिल देव की नजर में जवाब ‘नहीं’ है। उनके अनुसार, महानता में एक मानसिक पहलू होता है, एक एटीट्यूड होता है – और शायद वही सचिन के खेल से कहीं-कहीं गायब था।
हालांकि, यह भी सच है कि दुनिया भर में करोड़ों लोग सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का सबसे महान खिलाड़ी मानते हैं। उनके रनों की संख्या, तकनीक, विनम्रता और लंबे करियर ने उन्हें एक ऐसा मुकाम दिया है, जिसे पाना हर किसी के बस की बात नहीं।
डिस्क्लेमर: यह लेख कपिल देव द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों, इंटरव्यू और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। इसमें दी गई राय कपिल देव की व्यक्तिगत सोच पर आधारित है। हमारा उद्देश्य पाठकों को दोनों पक्षों की जानकारी देना है। किसी भी सुझाव या सुधार के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।





